नगरी -धमतरी जिले के नगरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोदलवनडी में वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब गंभीर विवाद का रूप ले चुकी है। जहां एक ओर विभाग इस कार्रवाई को नियमानुसार बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों ने कार्रवाई के दौरान मारपीट और अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए पूर्व में संबंधित परिवारों को नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद 15 अप्रैल 2026 को विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान लगभग 55 आदिवासी परिवारों के मकानों को हटाया गया।
कार्यवाही के दौरान कई घरों को तोड़ा गया और अंदर रखे घरेलू सामान जैसे बर्तन, कपड़े, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुएं बाहर निकाल दी गईं। इससे प्रभावित परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कई लोग अचानक बेघर हो गए।
दौड़ा-दौड़ा कर पीटने के गंभीर आरोप
घटना को लेकर सबसे सनसनीखेज आरोप यह सामने आया है कि कार्रवाई के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों एवं पालगांव वन समिति के ग्रामीणों द्वारा बोदलवनडी के लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।
पीड़ितों का कहना है कि उन्हें इतनी बेरहमी से मारा गया कि कई लोगों के कपड़े तक फट गए और कुछ को घसीटते हुए पीटा गया। ग्रामीणों के अनुसार, पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और कई लोगों को लाठी-डंडों से मारा गया। इस घटना में कुछ लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
बेघर हुए परिवार, संकट में जीवन
कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भोजन, पानी और आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। अचानक हुई इस कार्रवाई ने उनके सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
ग्रामीणों में आक्रोश, हटने से किया इनकार
घटना के बाद बोदलवनडी के ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि “हम वहां से हटने वाले नहीं हैं”। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
प्रशासन और विभाग का पक्ष
वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार की गई है और अतिक्रमण हटाना आवश्यक था। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्रवाई से पहले संबंधित परिवारों को नोटिस देकर समय दिया गया था।
निष्कर्ष
ग्राम बोदलवनडी की यह घटना अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बन गई है। अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और मारपीट के आरोपों के बीच सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर इस मामले पर टिकी हुई है।

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