नगरी ब्लॉक की 18 भवनविहीन शालाओं का मुद्दा विधानसभा में गूंजा सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने सरकार को घेरा...
नगरी - आदिवासी बहुल नगरी विकासखंड में संचालित 18 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं के भवनविहीन और जर्जर हालात का गंभीर मुद्दा बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा। सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने नियम 138(1) के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री का ध्यान इस अत्यंत संवेदनशील और मानवीय विषय की ओर आकृष्ट किया। विधायक मरकाम ने सदन में कहा कि नगरी विकासखंड की 18 शालाएं अपने स्वयं के भवन के अभाव में आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, मंदिर, निजी मकान एवं अन्य शासकीय भवनों में संचालित हो रही हैं। इन अस्थायी व्यवस्थाओं में न तो कक्षाओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है और न ही शौचालय, पेयजल, खेल मैदान, प्रयोगशाला एवं पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाएं, जिससे बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि कई विद्यालयों में संकरे कमरों और बरामदों में कक्षाएं लग रही हैं, जहां प्रकाश और वेंटिलेशन की समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। बरसात और गर्मी के मौसम में जर्जर भवनों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, वहीं कई बार नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कर पाना भी संभव नहीं हो पाता। विधायक मरकाम ने सरकार से मांग की कि नगरी विकासखंड की सभी 18 भवनविहीन शालाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर नए शाला भवनों की स्वीकृति दी जाए और भवन निर्माण हेतु आवश्यक बजट शीघ्र जारी किया जाए। साथ ही, जब तक नए भवनों का निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षित एवं उपयुक्त वैकल्पिक भवनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में स्कूल शिक्षा विभाग को कई बार पत्राचार कर मरम्मत एवं नए भवन की स्वीकृति की मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक न तो मरम्मत कार्य हो पाया है और न ही सभी विद्यालयों को नए भवनों की स्वीकृति मिली है। इससे ग्रामीण स्तर पर आक्रोश की स्थिति बन रही है और भविष्य में तालाबंदी जैसे आंदोलन की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि नगरी विकासखंड में कुल 18 शालाएं—16 प्राथमिक और 2 पूर्व माध्यमिक—जर्जर स्थिति में हैं। इनमें 14 प्राथमिक एवं 2 पूर्व माध्यमिक शालाएं मरम्मत योग्य हैं, इसलिए इनमें तालाबंदी नहीं की गई है। इन भवनों को डिस्मेंटल करने की प्रक्रिया कलेक्टर, धमतरी द्वारा की जा रही है।
मंत्री ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शाला प्रबंधन समितियों और समाजसेवी संगठनों के सहयोग से इन विद्यालयों को सामुदायिक भवनों, निजी भवनों एवं छात्रावासों में संचालित किया जा रहा है। जर्जर भवनों का निरीक्षण कर सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं तथा नए भवन निर्माण हेतु प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं। कुछ प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि अन्य स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं। नए भवनों के लिए भूमि चिन्हांकन का कार्य भी जारी है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति गंभीर है और प्रशासन की उदासीनता या व्यापक जनआक्रोश की बात सही नहीं है।
हालांकि, विधायक अंबिका मरकाम ने पूरक प्रश्न के माध्यम से सरकार से यह जानना चाहा कि विगत दो वित्तीय वर्षों 2024–25 एवं 2025–26 में किन-किन विद्यालयों की मरम्मत एवं नए भवन निर्माण के लिए बजट प्रावधान किए गए हैं, तथा अत्यंत जर्जर स्थिति वाले विद्यालयों को अब तक सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया।
यह मामला न केवल नगरी विकासखंड, बल्कि पूरे आदिवासी अंचल में सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि विधानसभा में दिए गए आश्वासन कितनी शीघ्रता और गंभीरता के साथ धरातल पर उतरते हैं।
