किसानों को एग्री पोर्टल पंजीयन में भारी परेशानी तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर


राज्योत्सव की ड्यूटी से ठप पड़ा काम


रिपोर्टर सूरज साव 
बसना। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी की तैयारी जोरों पर है, लेकिन इस बीच किसानों को एग्री पोर्टल में पंजीयन कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा धान बेचने के लिए एग्री पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है,जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है,वैसे-वैसे किसानों की भीड़ तहसील कार्यालयों में बढ़ती जा रही है ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही तहसील कार्यालय पहुँच रहे हैं,लेकिन पंजीयन कार्य धीमी गति से होने और कर्मचारियों की कमी के कारण अधिकांश किसानों को बिना कार्य करवाए वापस लौटना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार,अब तक लगभग 500 से लेकर 1000 से अधिक किसान ऐसे हैं जिनका पंजीयन अभी भी लंबित है।

राज्योत्सव की तैयारियों ने रोका पंजीयन कार्य

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 1 नवंबर को मनाया जाना है,जिसके चलते अधिकांश राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी कार्यक्रम स्थल पर लगा दी गई है। इसका सीधा असर किसानों के एग्री पोर्टल पंजीयन कार्य पर पड़ा है। तहसील कार्यालयों में अधिकारी अनुपस्थित हैं,जिससे किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी निराश लौट रहे हैं।किसानों का कहना है कि “अगर पंजीयन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई तो हम धान नहीं बेच पाएंगे, जिससे आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।”

सिस्टम चल नहीं रहा,सर्वर डाउन”—किसानों की व्यथा

कई किसानों ने बताया कि पंजीयन केंद्रों में अक्सर एग्री पोर्टल सर्वर डाउन रहने की समस्या है। सिस्टम हैंग होने या बार-बार बंद पड़ने से फॉर्म भरने में घंटों लग रहे हैं। कुछ किसानों को 2 से 3 दिन तक बार-बार आना पड़ रहा है। वार्डों और गांवों से आए किसानों ने बताया कि पंजीयन के लिए पहले किसान कार्ड की जानकारी दर्ज करनी होती है,उसके बाद ही धान पंजीयन के लिए सोसायटी में आवेदन किया जा सकता है। लेकिन एग्री पोर्टल पर प्रारंभिक पंजीयन ही नहीं हो पा रहा है।

तारीख बढ़ाने की मांग उठी

इन हालातों को देखते हुए किसानों ने सरकार से अपील की है कि एग्री पोर्टल पंजीयन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। किसानों का कहना है कि “पंजीयन की तारीख कम से कम एक सप्ताह बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी किसान धान बेचने से वंचित न रह जाए।”किसान संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि राज्योत्सव की तैयारियों के दौरान तहसील कार्यालयों में पंजीयन कार्य के लिए अलग से कर्मियों की व्यवस्था की जाए,ताकि किसानों को राहत मिल सके।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि राज्योत्सव के बाद पंजीयन प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा कराया जाएगा। अधिकारियों ने दावा किया है कि अंतिम तिथि से पहले अधिकतम किसानों का पंजीयन पूरा कराने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, किसानों की भीड़ और सिस्टम की धीमी गति प्रशासन के लिए अब भी चुनौती बनी हुई है।

समापन में धान खरीदी छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सालभर की मेहनत का प्रतिफल होती है। ऐसे में एग्री पोर्टल पंजीयन की समस्या ने उन्हें चिंता में डाल दिया है। अब सबकी नज़र सरकार और प्रशासन पर टिकी है कि क्या वे किसानों की मांगों को देखते हुए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाते हैं या नहीं।
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