राजिम पावन धाम-बेलाही घाट

राजिम पावन धाम, इहाँ चंदन कस माटी।
नदी नहाथें लोग, हवय सुग्घर परिपाटी।।
ऋषि लोमश के वास, घाट बेलाही हावै।
त्रेतायुग के गोठ, आज भी मन ला भावै।।

काक भुसुंडी पाय, ज्ञान ला ऋषि लोमश ले।
होवै बंधन मुक्त, जगत के माया वश ले।।
अमर हवय ये संत, लोग सब परछो पाथें।
जम्मो ग्रंथ पुराण, कथा आश्रम के गाथें।।

सिया राम के संग, अनुज लक्ष्मण जी आइस।
काटिस हे वनवास, घाट के मान बढ़ाइस।।
बड़े–बड़े मुनि साधु, कुटी मा धुनी रमाथें।
करथें जप-तप योग, शंभु के मंदिर जाथें ।।

महानदी के पार, जिला धमतरी कहाथे।
लक्ष्मण झूला भव्य, देख के मन हरसाथे।।
कतका करॅंव बखान, धाम के महिमा भारी।
तर जाथें सब जीव, इहाॅं आ के सँगवारी।।


//रचनाकार//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़
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