ग्रामीणों ने जनसहयोग से सोढूर नदी पर रपटा निर्माण नगरी -भुतेश्वर महादेव गरियाबंद दूरी कम पड़ेगी

नगरी - नगरी विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित नगरी–चारगांव–जबर्रा खरका मार्ग व काजलसारा जुनाडीही बनियाडीही से महाशिव लिंग भुतेश्वर बाबा मंदिर गरियाबंद के बीच पर सोढूर नदी पड़ती है जो बरसात में धमतरी और गरियाबंद जिले के ग्रामीणों के लिए आवागमन का बड़ा बाधक बन जाती है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे दोनों जिलों के लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बरसात समाप्त होने के बाद हर साल की तरह इस वर्ष भी दोनों जिलों के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से मिट्टी भरकर नदी पर रपटा का निर्माण किया, जिससे नगरी से गरियाबंद की लगभग 40 किलोमीटर की दूरी ग्रामीणों के लिए सुगम हो सके। जनसहयोग से तैयार किए गए इस अस्थायी रपटे ने आवागमन को सामान्य बनाया है। जिसमे पूर्व सरपंच ने एवं ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से शासन-प्रशासन से यहां स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस ओर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। ग्रामीण जनों ने कहा कि पुल निर्माण से बारिश के मौसम में होने वाली परेशानी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

रपटा निर्माण के लिए ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से लगभग 40,000 रुपये का चंदा एकत्र किया, जिसमें पूर्व सरपंच धनुषधारी कुमार, विजय कुमार, राजूराम नेताम, लोकेश्वर पटेल, तुलूराम मरकाम, निरन कुमार, गंगादेव सोरी, त्रिभुवन सोरी, जेठूराम कुमार, सिलाल साहू, शेषनारायण साहू, द्वारका साहू, कुलेश्वर साहू, वायु साहू, यशवंत साहू, हेमराज साहू, हेमत साहू, नवीन साहू, हेमू साहू, यशवंत ध्रुव, पूनम साहू, टेमन साहू, उमेश साहू, कुंजबिहारी साहू, दिगेश साहू, संतोष दीवान, डॉ. हेमराज साहू, कांता ध्रुव, अशोक कुमार, हरिचंद कुमार सहित दोनों जिलों के अनेक ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि शासन-प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी मांग पर ध्यान देते हुए जल्द ही यहां स्थायी पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
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