सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प,कपसाखुंटा में विराट हिन्दू सम्मेलन ऐतिहासिक रूप से संपन्न


महासमुंद/बसना।  सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा, सामाजिक समरसता तथा सशक्त राष्ट्र निर्माण के मूल मंत्र को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ग्राम कपसाखुंटा, बसना में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन ऐतिहासिक एवं प्रेरणास्पद वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन में क्षेत्र भर से आए समाज के सम्मानित, प्रबुद्ध, धर्मनिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं एवं बुजुर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में सांस्कृतिक मूल्यों पर हो रहे आघात,सामाजिक विघटन एवं वैचारिक भ्रम की स्थिति को देखते हुए यह सम्मेलन आयोजित किया गया, ताकि हिन्दू समाज को संगठित कर अपनी सनातन परंपराओं के प्रति जागरूक किया जा सके। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं को संस्कारवान बनाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध जागृत करना रहा।

वक्ताओं ने सनातन मूल्यों की महत्ता पर डाला प्रकाश

सम्मेलन के मुख्य वक्ता श्रीमान नागेन्द्र सोसाती जी, क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की पूर्ण वैज्ञानिक और नैतिक पद्धति है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाते हुए संस्कृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए। 

विशिष्ट अतिथि श्रीमती रमाकांति दास, विश्व हिन्दू परिषद की जिला उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक नारी सशक्त नहीं होगी, तब तक समाज सशक्त नहीं हो सकता। उन्होंने संस्कृति, संस्कार और सामाजिक एकता को बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर हुआ मंथन

सम्मेलन में वक्ताओं द्वारा सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे, धर्म के प्रति आस्था, राष्ट्रभक्ति एवं युवाओं की दिशा-दशा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने युवाओं से नशामुक्त, संस्कारयुक्त एवं राष्ट्रहित में कार्य करने वाला जीवन अपनाने का आह्वान किया।

भजन-कीर्तन से भक्तिमय बना पूरा क्षेत्र कार्यक्रम के दौरान आयोजित कीर्तन सभा ने पूरे ग्राम और आसपास के क्षेत्र को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया। भारती खम्हारी, डोली शाह, सुमन सिदार, मालती कुटिया, बोधराम सिदार, सुमित गुप्ता एवं नित्यानंद भोई द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। भक्ति गीतों ने सम्मेलन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

भोजन प्रसाद से सेवा भाव का परिचय

आयोजक मंडल द्वारा सम्मेलन में पधारने वाले सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं के लिए भोजन प्रसाद की उत्तम व्यवस्था की गई। आयोजकों ने सेवा भावना के साथ सभी आगंतुकों का स्वागत किया, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और गरिमा और बढ़ गई।

सम्मेलन से समाज में सकारात्मक संदेश

विराट हिन्दू सम्मेलन के माध्यम से समाज में सांस्कृतिक चेतना, वैचारिक स्पष्टता और संगठन शक्ति का संदेश गया। कार्यक्रम के अंत में सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक एकता एवं राष्ट्रहित में सतत कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
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