नगरी अंचल में खेतों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं से हवा दूषित, जिसके चलते खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
नगरी - नगरी क्षेत्र में इन दिनों खरीफ फसल की कटाई-मिजाई का कार्य संपन्न होने जा रहा है खेतों में हार्वेस्टर से धान की मिजाई किया गया है साथ ही बड़ी संख्या में किसान रबी फसल की तैयारी हेतु खेतों में बची पराली (फसल अवशेष) को आग के हवाले करते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कई स्थानों पर सड़क किनारे धधकती पराली व उठते धुएं के गुबार साफ नजर आ रहे हैं, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और रोड पर आने जाने वाले लोगों को प्रदूषण से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में गांवों में संचालित गौठानों में पशुओं हेतु चारा व्यवस्था के लिए किसानों द्वारा बड़ी मात्रा में पैरा दान किया जाता था, और गांव में किसानों को पंचायत स्तर मना किया जाता था और साथ जिससे पराली जलाने की घटनाएं कम होती थीं। वर्तमान भाजपा सरकार में गौठान गतिविधियां ठप होने से पैरा दान की परंपरा भी प्रभावित हुई है, जिसके चलते खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
वही विभागीय अधिकारियों को किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने तथा वैकल्पिक उपयोग जैसे कम्पोस्ट निर्माण, मल्चर उपयोग, पशु आहार आदि के संबंध में मार्गदर्शन देने के निर्देश नहीं दिए जा रहे किंतु विभाग की उदासीनता के कारण न तो गांवों में जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्यवाही दिखाई दी,
नगरी अंचल में खेतों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं से हवा दूषित,वर्तमान भाजपा सरकार में गौठान गतिविधियां ठप होने से पैरा दान की परंपरा भी प्रभावित हुई है, जिसके चलते खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। जिसमे फरसिया, अमाली, साकरा, घटुला, उमरगांव ,सिहावा, गढ़डोंगरी, बेलर, सेमरा, आमगांव, भुरसीडोंगरी, घोटगांव बिरगुडी और डोगरडुला, चमेदा सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सड़क किनारे बड़ी संख्या में खेतों में पराली जलाने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। जगह-जगह उठता घना धुआँ न केवल राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि वातावरण को भी गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है।
बेलरगांव क्षेत्र में खेतों पलारी जलाने बड़ी संख्या में दिखाई दे रहा है
कुछ किसानों का कहना है कि समयाभाव, खेतों की सफाई तथा अगली फसल की तैयारी के कारण में पराली जलाने दिखाई दे रहा हैं। ग्रामीणजन बताते हैं कि प्रशासन और कृषि विभाग यदि समय रहते गांव-गांव जाकर पराली प्रबंधन की जानकारी दें तथा आवश्यक साधन उपलब्ध कराएं, तो पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सकता है और मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रह सकती है।
जनपद सदस्य प्रमोद कुंजाम ने कहा कि “हमारी पूर्ववर्ती सरकार में गौठानों के माध्यम से पशुओं हेतु पैरा लिया जाता था, जिससे किसान पराली नहीं जलाते थे। वर्तमान में न तो किसानों को उचित जानकारी दी जा रही है और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई हो रही है, जिसके कारण पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।”
पराली जलाने से बढ़ते प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही के बीच ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने संबंधित दिखाई दे रहा है
इस संबंध में संबंधित कृषि विभाग के जानकारी चाहिए उसके द्वारा बताया गया था कि यहां पैरा जलाने जानकारी मिली है जिसमे राजस्व विभाग के द्वारा कार्यवाही किया जाता कहा गया
