दे दे पइसा मोला दाई, छत्तीसगढ़ी बच्चों की कविता


दे दे पइसा मोला दाई। 
मेला जाबो बहिनी–भाई।।
सरकस मा हे भालू बंदर।
टिकट कटा के घुसबो अंदर।।

चश्मा पहिरे बंदर रहिथे।
अइसन मोर संगी मन कहिथे।।
आँखी मूंदे रस्सी चढ़थे।
नाचत भालू आगू बढ़थे।।

झन कर देरी तैं हा दाई।
बिसा लुहूँ मॅंय मुर्रा लाई।।
धक्का–मुक्की रेलम पेला।
किसम–किसम के लगथे ठेला।।

देखे के मन होवत भारी।
भाई रोवत हे महतारी।।
नवा–नवा हम जिनिस बिसाबो।।
संगी मन‌ ला टुहूॅं दिखाबो।।

//लेखिका//
प्रिया देवांगन "प्रियू"
राजिम
जिला - गरियाबंद
छत्तीसगढ़
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