सीता नदी टायगर रिजर्व क्षेत्र में अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे ग्रामीण – घास-फूस की झोपड़ी में अध्ययन छात्र

नगरी - विकासखंड नगरी अंतर्गत सीता नदी टायगर रिजर्व क्षेत्र के खल्लारी ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम गाताबहारा स्थित प्राथमिक शाला की स्थिति इन दिनों अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। वर्ष 1997 में स्थापित इस विद्यालय का भवन बीते लगभग दो वर्षों से जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। वर्तमान में यहां अध्ययनरत 12 छात्र-छात्राएं असुरक्षित भवन के कारण घास-फूस की अस्थायी झोपड़ी में पढ़ाई करने को विवश हैं।
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसमें बच्चों का बैठना जोखिम भरा हो सकता है। एहतियात के तौर पर भवन का उपयोग बंद कर दिया गया है। गांव में किसी अन्य शासकीय भवन या अतिरिक्त कक्ष की उपलब्धता नहीं होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। ऐसे में बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इस उद्देश्य से ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से लकड़ी और घास-फूस की झोपड़ी बनाकर अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करना शुरू किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धमतरी जिले का यह वनांचल क्षेत्र आज भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास भी किया गया है। टायगर रिजर्व क्षेत्र होने के कारण विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के चलते विकास कार्यों में विलंब होने की बात भी सामने आती रही है।

विद्यालय के प्रधान पाठक ने बताया कि कुछ समय तक आंगनबाड़ी केंद्र तथा वर्षा ऋतु में वन विभाग के निर्माणाधीन भवन में अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित की गई थीं। निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ होने के बाद वर्तमान में स्कूल परिसर में ग्रामीणों द्वारा निर्मित झोपड़ी में लगभग चार माह से पढ़ाई जारी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने जानकारी दी कि जर्जर भवन की सूचना शासन-प्रशासन को प्रेषित की जा चुकी है। नगरी विकासखंड में कई विद्यालयों के लिए नए भवनों की आवश्यकता चिन्हित की गई है तथा जहां भवन अत्यधिक जर्जर हैं, वहां वैकल्पिक स्थानों पर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।

कुछ ग्रामीणों एवं पालकों की मांग है कि गाताबहारा प्राथमिक शाला के लिए शीघ्र ही सुरक्षित एवं स्थायी भवन की स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके और भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका न रहे।
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