खेल मड़ई के तहत महिला पत्रकारों का रोमांचक क्रिकेट फाइनल सम्पन्न


रायपुर :- खेल और संवाद के समन्वय का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित खेल मड़ई के अंतर्गत महिला पत्रकारों के क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला शहर के ऐतिहासिक सुभाष स्टेडियम में उत्साह और रोमांच के बीच संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में खेल भावना,प्रतिस्पर्धा और महिला सशक्तिकरण की शानदार झलक देखने को मिली।

फाइनल मुकाबले में शक्ति टीम ने बेहतरीन समन्वय,सटीक गेंदबाजी और आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। वहीं तेजस्वी टीम ने भी कड़ा संघर्ष करते हुए दर्शकों का दिल जीत लिया और उपविजेता रही। मैच के दौरान खिलाड़ियों का आत्मविश्वास,ऊर्जा और मैदान पर उनका अनुशासन सराहनीय रहा। दर्शकों की जोरदार तालियों और उत्साहवर्धन ने पूरे स्टेडियम का माहौल खेलमय बना दिया।

यह टूर्नामेंट केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं,बल्कि महिला पत्रकारों के लिए आपसी सहयोग,संवाद और आत्मबल को मजबूत करने का मंच भी बना। मीडिया जगत की महिलाओं ने यह सिद्ध किया कि वे कलम के साथ-साथ खेल के मैदान में भी समान रूप से सक्षम हैं।आयोजन का उद्देश्य पत्रकारों के बीच तनावमुक्त वातावरण तैयार करना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए दोनों टीमों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि खेल व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और ऐसी प्रतियोगिताएँ महिलाओं में नेतृत्व क्षमता,आत्मविश्वास और टीम भावना को सशक्त करती हैं। मंत्री ने विजेता शक्ति टीम एवं उपविजेता तेजस्वी टीम को प्रोत्साहित करते हुए दोनों को 21-21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

समारोह के दौरान पुरस्कार वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया,जिसमें खिलाड़ियों को ट्रॉफी और सम्मान चिन्ह प्रदान किए गए। आयोजन में शहर के अनेक पत्रकार,सामाजिक प्रतिनिधि और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने महिला पत्रकारों के इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से कराने की अपेक्षा जताई। खेल मड़ई के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि पत्रकारिता और खेल,दोनों ही क्षेत्रों में महिलाएँ निरंतर नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं। यह फाइनल मुकाबला न केवल प्रतियोगिता का समापन था,बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायी मिसाल भी बन गया।

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