श्रावण मास में शिवभक्ति की गुंजा कोटा से बेलपान होते हुए बूढ़ा महादेव रतनपुर तक निकली कांवड़ यात्रा


सेवा और श्रद्धा से सराबोर हुआ नगर

बिलासपुर/कोटा :- पवित्र श्रावण मास में बोल बम सेवा समिति कोटा-रतनपुर द्वारा बेलपान से पवित्र जल लेकर बूढ़ा महादेव रतनपुर तक निकाली गई भव्य कांवड़ यात्रा एक बार फिर श्रद्धा,आस्था और सेवा भाव की मिसाल बन गई। प्रतिवर्ष की परंपरा अनुसार इस वर्ष भी सैकड़ों कांवड़िए सुबह से ही "बोल बम" के जयघोष के साथ नगर से रवाना हुए। उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।


कोटा नगर शिवमय हो गया था — हर गली, हर नुक्कड़, हर मार्ग पर भक्तों ने कांवड़ियों के स्वागत हेतु चाय-पानी,नींबू पानी,फल एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की। नगरवासियों ने सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। छोटे-बड़े सभी उम्र के लोग श्रद्धा से इस यात्रा में सहभागी बने। बोल बम सेवा समिति द्वारा अग्रसेन भवन में विशेष रूप से भोजन-प्रसाद का आयोजन किया गया, जहां हजारों भक्तों को स्वादिष्ट एवं सात्विक भोजन परोसा गया।

पूरे कार्यक्रम में समिति के सदस्यों, स्थानीय युवाओं और सेवाभावी नागरिकों ने पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारी निभाई। भोजन, विश्राम, जलपान से लेकर मेडिकल सुविधा तक हर व्यवस्था का सुनियोजित संचालन किया गया। महिलाएं, बच्चे,बुजुर्ग सभी शिवभक्ति में डूबे दिखे। युवाओं की टोली ढोल-नगाड़ों के साथ “बोल बम” के उद्घोष करते हुए आगे बढ़ रही थी,जिससे वातावरण पूरी तरह भक्ति में डूबा हुआ नजर आया।


इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि— "श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस कांवड़ यात्रा के माध्यम से हम सभी शिवभक्तों को एक साथ जुड़ने,सेवा करने और भक्ति से भरपूर वातावरण में सहभागी बनने का अवसर मिलता है।" यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। रूट पर साफ-सफाई, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा की दृष्टि से समुचित व्यवस्था की गई थी।

श्रद्धालुओं के अनुसार,कोटा नगर में इस प्रकार की आध्यात्मिक यात्रा और सेवा आयोजन समाज में सद्भाव, एकता और धार्मिक चेतना को बढ़ावा देने का काम करती है। युवाओं के बढ़-चढ़ कर भाग लेने से नई पीढ़ी में भी धार्मिक परंपराओं और मूल्यों के प्रति जागरूकता आई है। इस प्रकार यह कांवड़ यात्रा न केवल शिवभक्ति का प्रतीक बनी,बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा की भावना का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर गई।

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