खाद-यूरिया संकट ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें,सरकार की लापरवाही से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा : जसबीर सिंह
रायपुर :- छत्तीसगढ़ के किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। खरीफ सीजन के बीच किसानों को खाद और यूरिया की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री जसबीर सिंह चावला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की साय सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश सहकारी समितियों में खाद और यूरिया का स्टॉक उपलब्ध ही नहीं है,जिसके चलते किसान सोसाइटियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
चावला ने कहा कि इस बार खरीफ की फसलों की बुआई के लिए समय पर खाद और डीएपी किसानों तक नहीं पहुँच पाई। खाद की कमी के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। अगर यही हालात रहे तो उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही से किसानों की जरूरत का केवल एक चौथाई खाद ही उपलब्ध कराया गया है।
निजी व्यापारियों की चांदी,किसानों की जेब पर बोझ
किसानों को सरकारी दर से मिलने वाली खाद और यूरिया खुले बाजार में कई गुना दामों पर खरीदनी पड़ रही है। 266 रुपए की यूरिया किसानों को 1000 रुपए तक में और 1350 रुपए की डीएपी 2000 रुपए तक में खरीदनी पड़ रही है। चावला ने आरोप लगाया कि सरकार की संरक्षण प्राप्त मिलावटखोर लॉबी और निजी विक्रेता किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। यह पूरा खेल कृत्रिम संकट पैदा कर किसानों को लूटने और निजी विक्रेताओं को लाभ पहुँचाने के लिए रचा गया है।
कई जिलों में गंभीर हालात
दुर्ग,राजनांदगांव,बेमेतरा,महासमुंद,बिलासपुर,धमतरी सहित कई जिलों की सहकारी समितियों में खाद की आपूर्ति न होने से किसान परेशान हैं। इन जिलों में खेतों में समय पर खाद और यूरिया नहीं पहुँच पाने से धान सहित अन्य फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हुई है,जिससे खेतों में दरारें पड़ रही हैं। यदि समय पर खाद और यूरिया मिल जाता तो इन परिस्थितियों को कुछ हद तक संभाला जा सकता था।
आत्महत्या को मजबूर न हो जाए किसान!
प्रदेश संगठन महामंत्री ने चेतावनी दी कि सरकार की गैर-जिम्मेदारी और लापरवाह रवैये से किसान यदि आत्महत्या करने पर मजबूर होता है,तो इसकी सीधी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि किसान सबका पेट भरने वाला है,लेकिन वही आज भूखा और लाचार नजर आ रहा है।
फार्मर आईडी और एग्री स्टेट पोर्टल की गड़बड़ियां
चावला ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में हजारों किसानों को एग्री स्टेट पोर्टल की गड़बड़ियों का सामना करना पड़ रहा है। भू-अभिलेख डाटा अपडेट न होने से किसान फार्मर आईडी के पंजीयन के लिए भटक रहे हैं। अधिकांश गांवों का वर्ष 2022 के बाद का डाटा पोर्टल में अपलोड ही नहीं हुआ है। खरीफ फसलों का डिजिटल सर्वेक्षण 15 अगस्त से 30 सितंबर तक होना है,लेकिन लाखों किसान इस प्रक्रिया से बाहर रह सकते हैं। अब तक प्रदेश के 20551 गावों में से केवल 14560 गावों का ही जियो-रेफरेंस कार्य पूरा हुआ है। आने वाले समय में धान खरीदी के लिए फार्मर आईडी आवश्यक होगी,ऐसे में बड़ी संख्या में किसान इस व्यवस्था से वंचित रह सकते हैं।
आम आदमी पार्टी की चेतावनी
जसबीर सिंह चावला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार किसान विरोधी सरकार साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करेगी। यदि आने वाले दिनों में किसानों की परेशानियों का समाधान नहीं हुआ तो आम आदमी पार्टी किसानों के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।

