नारी शक्ति समिति गनियारी : अनुबंध की अनदेखी से दीदियों को नहीं मिल रहा काम व मेहनताना,गहराया आर्थिक संकट सशक्तिकरण के सपने पर ग्रहण


बिलासपुर/गनियारी :- महिलाओं के आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाने वाली नारी शक्ति समिति गनियारी आज गहरे आर्थिक संकट से जूझ रही है। यहाँ कार्यरत दीदियों का अनुबंध भले ही दक्षिण एक्सटीसी प्राइवेट लिमिटेड से किया गया था,लेकिन कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया गया। नतीजा यह है कि सैकड़ों महिलाएँ,जिन्होंने अपने श्रम और मेहनत से इस समिति को खड़ा किया था,आज बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के अंधेरे में धकेल दी गई हैं।

पहले 430 महिलाएँ,अब मात्र 40 तक सीमित गनियारी और नगोई मिलाकर पहले लगभग 430 महिलाएँ इस समिति से जुड़ी थीं। यहाँ सिलाई-कढ़ाई का काम कर वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं बल्कि समाज में आत्मनिर्भरता का एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही थीं। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि गनियारी में मात्र 20 और नगोई में 20 महिलाएँ ही काम कर पा रही हैं। शेष दीदियों को न तो नियमित काम मिल रहा है और न ही मेहनताना। मजबूरी में अधिकतर महिलाओं ने फैक्ट्री आना ही बंद कर दिया है।

काम और वेतन दोनों अधर में महिलाओं का कहना है कि फैक्ट्री में अनुबंध के अनुसार कपड़ा समय पर उपलब्ध नहीं कराया जाता। जो काम मिलता भी है,उसका भुगतान नियमित रूप से नहीं होता। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कई महिलाएँ कर्ज़ में डूब रही हैं। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च ठप पड़ गया है।

वेंडर की धमकियाँ और अपमानजनक व्यवहार दीदियों का दर्द सिर्फ आर्थिक नहीं है,बल्कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि मेहनत के बावजूद जब वे वेतन की माँग करती हैं तो वेंडर उन्हें धमकाते हैं – “जहां शिकायत करना है करो,कलेक्टर के पास जाना है तो जाओ।” इस तरह का रवैया महिलाओं के सम्मान और श्रम के मूल्य दोनों को आहत करता है।

सशक्तिकरण के नाम पर सवाल नारी शक्ति समिति का गठन महिलाओं को रोजगार देने,उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और सामाजिक-आर्थिक रूप से मज़बूत करने के उद्देश्य से किया गया था। सरकार और प्रशासन द्वारा भी ऐसे प्रयासों को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। लेकिन जब दीदियों को ही समय पर काम और मेहनताना नहीं मिल रहा, तो यह पूरा प्रयास सवालों के घेरे में आ जाता है।

दीदियों की माँग – नई कंपनी को जिम्मेदारी समिति से जुड़ी महिलाओं ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि मौजूदा वेंडर को हटाकर किसी दूसरी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी जाए,ताकि समय पर काम और भुगतान मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो समिति की मेहनती महिलाएँ अपने भविष्य को लेकर पूरी तरह निराश और हताश हो जाएँगी।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल यह समस्या न केवल कंपनी की लापरवाही को उजागर करती है,बल्कि प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। आखिर क्यों महिलाओं के हक़ और श्रम की अनदेखी हो रही है? क्यों महिलाओं को आत्मनिर्भरता की योजनाओं में शामिल कर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है? नारी शक्ति समिति गनियारी की यह पीड़ा केवल गनियारी या नगोई की समस्या नहीं है,बल्कि यह पूरे प्रदेश में महिलाओं के स्वावलंबन और सशक्तिकरण की योजनाओं की असलियत पर गहरी चोट करती है। सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन कब जागेगा और इन दीदियों के श्रम का सही मूल्य कब दिलाया जाएगा?

Next Post Previous Post
No Comment
Add Comment
comment url