नगरी के डमका-डीही क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे का अंबार, शराब दुकान के आसपास 2 किमी तक फैली गंदगी


विभागीय उदासीनता से बढ़ रहा पर्यावरण संकट, नागरिकों ने जताई गहरी चिंता

नगरी। नगर के डमका-डीही वार्ड क्रमांक 1 में संचालित शराब दुकान के आसपास प्लास्टिक कचरे का अत्यधिक फैलाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है। दुकान से करीब 2 किलोमीटर के दायरे में जंगल, खेत-खलिहान और रास्तों पर बड़ी मात्रा में पॉलीथिन, डिस्पोजेबल ग्लास, पानी की बोतलें तथा अन्य प्लास्टिक कचरा दिख रहा है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय जैवविविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा प्लास्टिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद क्षेत्र में खुलेआम पॉलीथिन व डिस्पोजेबल सामग्री का उपयोग और बिक्री जारी है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

जंगलों में फैले प्लास्टिक कचरे से प्राकृतिक संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं। डमका-डीही के समीप सराई (साल) पेड़ों से गिरने वाला बोड़ा (बीज) साथ छोटे छोटे औषधि पौधों भारी मात्रा में निकलना रहे थे, लेकिन प्लास्टिक कचरे की भरमार के कारण बीज ढंक जाते हैं, जिससे प्राकृतिक पुनरुत्पादन पर असर पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने कहा कि नगर को पॉलीथिन मुक्त बनाने की आवश्यकता अब अत्यंत जरूरी हो गई है। कई बार लोगों ने स्वयं प्रयास भी किए, लेकिन बिना प्रशासनिक सहयोग या सख्त कार्रवाई के इन प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए। 

उनका कहना है कि केवल नगर पंचायत नगरी की सीमित कार्यवाही पर्याप्त नहीं है—शासन और प्रशासन दोनों को मिलकर ठोस दिशा-निर्देश और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

नगरवासियों ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित निरीक्षण कर प्लास्टिक उपयोग और अवैध निपटान पर रोक लगाने ठोस कदम उठाए जाएँ। उनका मानना है कि यदि सख्ती से नियम लागू किए जाएँ, तो धीरे-धीरे लोग पॉलीथिन और डिस्पोजेबल वस्तुओं के उपयोग को कम करने लगेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक और डिस्पोजेबल वस्तुओं का अनियंत्रित उपयोग न केवल नगर की स्वच्छता को प्रभावित करता है, बल्कि मिट्टी, भूजल और वायु प्रदूषण के जरिए मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। लंबे समय तक प्लास्टिक का संपर्क कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है।

नागरिकों ने स्वयं भी प्लास्टिक मुक्त विकल्प अपनाने और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि पर्यावरण सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है।

स्थानीय लोगों ने आशा व्यक्त की है कि संबंधित विभाग उचित पहल कर इस गंभीर समस्या का समाधान निकालेगा, जिससे प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षित रहे और नगरी को स्वच्छ व स्वस्थ बनाने दिशा में ठोस प्रगति हो सके।
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