दो माह से सरिया बिछाकर छोड़ा गया निर्माण कार्य, गुणवत्ता व सुरक्षा पर उठे सवाल निर्माण कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं...
नगरी - केंद्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल–हर घर मुस्कान के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसी क्रम में विकासखंड नगरी अंतर्गत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पाइपलाइन, वाटर टैंक एवं फिल्टर प्लांट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
नगरी विकासखंड में सांकरा समूह जल आपूर्ति योजना के अंतर्गत घटुला समूह जल आपूर्ति योजना सहित 36 गांवों को जोड़ा जा रहा है, जिसके माध्यम से लगभग 29,458 अधिक घरों को पेयजल सुविधा प्रदान की जानी है। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कार्य चल रहा है।
हालांकि, घटुला क्षेत्र में इन योजनाओं की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी चाल से निर्माण किया जा रहा है, जहां अब तक लगभग प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो पाया है।
कलेक्टर अविनाश मिश्रा द्वारा कुछ महीनों पूर्व विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि योजनाओं का वास्तविक लाभ समयबद्ध रूप से हितग्राहियों तक पहुंचे। जल जीवन मिशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवनशैली में सुधार का संकल्प है। नगरी विकासखंड ने इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करते हुए जिले को राज्य और देश स्तर पर पहचान दिलाई है, किंतु जमीनी स्तर पर कुछ स्थानों पर लापरवाही भी सामने आ रही है।
निर्माण स्थल पर गंभीर लापरवाही
घटुला गांव में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर गंभीर लापरवाही उजागर देखने को मिल रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, लगभग दो माह पूर्व सरिया बिछाने के बाद कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे निर्माण पूरी तरह ठप पड़ा है। खुले में पड़े सरिया एवं अधूरा ढांचा न केवल निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर खतरा बना हुआ है।
जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक सरिया खुले में पड़े रहने से उसमें जंग लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे भविष्य में बनने वाले ढांचे की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
इसके साथ ही, निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने से ठेकेदार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप कार्य किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कुछ मजदूरों ने कहा कि ठेकेदार पर आरोप भुगतान लगाया है
क्षेत्र के कुछ मजदूरों ने बताया कि लगभग 6 माह पूर्व कार्य हुआ था, जिसमें 7–8 मजदूर कार्यरत थे। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा उनसे प्रति व्यक्ति 8,000 रुपये से अधिक की राशि लेना है, लेकिन अब तक पूरा भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान न मिलने के कारण मजदूरों ने उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी, किंतु अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
प्रशासन व विभागीय पक्ष
इस संबंध में साइड इंजीनियर पवन कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य जल्द ही पुनः प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूचना बोर्ड लगाया गया था तथा निर्माण कार्य गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी मजदूरों का भुगतान किया जा चुका है।
वहीं, पीएचई एसडीओ ठाकुर से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि ठेकेदार को कार्य में हो रही धीमी प्रगति को लेकर निर्देश दिए गए हैं और जल्द ही काम प्रारंभ कराया जाएगा।
कार्रवाई की मांग
कुछ स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग उच्च अधिकारी तत्काल स्थल निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता एवं प्रगति की जांच करे तथा लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाए। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य पुनः शुरू कराएगा, ताकि सार्वजनिक धन का सदुपयोग हो सके और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
