भाजपा सरकार पर शासकीय धान खरीदी में अव्यवस्थाओं का आरोप, किसान परेशान — पूर्व विधायक लक्ष्मी धुव

नगरी।शासकीय धान खरीदी व्यवस्था में व्याप्त गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पूर्व विधायक लक्ष्मी धुव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान खरीदी व्यवस्था के कारण किसान आर्थिक एवं मानसिक दोनों रूप से परेशान हैं। किसानों को धान बेचने के लिए कई-कई दिनों तक खरीदी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर खरीदी नहीं हो पा रही है।
किसानों ने बताया कि धान खरीदी केंद्रों में टोकन व्यवस्था, तौल प्रक्रिया और बारदाने की उपलब्धता को लेकर लगातार समस्याएं बनी हुई हैं। कई केंद्रों पर धान सुखाने और सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से फसल खराब होने का खतरा बना हुआ है। वहीं धान विक्रय के बाद भुगतान में हो रही देरी के कारण किसान कर्ज चुकाने एवं घरेलू जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं।

ग्रामीण अंचलों से आए किसानों का कहना है कि टोकन कटाने के बाद भी उन्हें बार-बार लाइन में लगना पड़ता है। दूर-दराज से धान लेकर केंद्रों तक पहुंचने के बावजूद बारदाने की कमी, सर्वर की समस्या और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे किसानों की मेहनत और समय दोनों व्यर्थ हो रहे हैं।
पूर्व विधायक लक्ष्मी धुव ने कहा कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है। शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया गया है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर किसानों को केवल 2369 रुपये ही मिल रहे हैं, शेष राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। इससे छोटे एवं सीमांत किसानों की स्थिति और अधिक दयनीय होती जा रही है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खेतों में गिरदावरी हो जाने के बावजूद टोकन कटवाने के लिए पटवारी एवं तहसीलदार से अतिरिक्त लिखवाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिसके चलते छोटे किसानों को 1700 से 1900 रुपये तक बिचौलियों या व्यापारियों को देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी व्यवस्था को शीघ्र दुरुस्त किया जाए, खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिल सके। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सुशासन का ढोल पीट रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
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