कथावाचक गिरी बापू जी महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति सत्संग नहीं करता, उसके जीवन में खान-पान, वाणी और व्यवहार में विवेक का अभाव हो जाता है।...
नगरी - देऊरपारा सिहावा स्थित पावन कर्णेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक गिरी बापू जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित 828वीं श्री शिव महापुराण कथा के आठवें दिवस श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और संपूर्ण परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
अपने प्रेरक प्रवचन में गिरी बापू जी महाराज ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि खेतों में फसल अवशेष जलाना महापाप के समान है। इससे न केवल छोटे-छोटे जीव-जंतुओं की मृत्यु होती है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचती है। उन्होंने कहा कि खेतों में आग लगाने से वातावरण प्रदूषित होता है और इसका नकारात्मक प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है। अग्नि जलाना दोषपूर्ण कर्म है, जिससे जीवन में दरिद्रता और कष्ट आते हैं।
गिरी बापू जी महाराज ने अपने प्रवचन में जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में सोना-चांदी या धन का महत्व नहीं, बल्कि गुणों का महत्व होता है। गुणवान व्यक्ति की हर स्थान पर प्रतिष्ठा होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में ऊंच-नीच का भाव नहीं रखना चाहिए, बल्कि विवेक से आचरण करना चाहिए। विवेक और विनय (विनायक) जीवन के प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने सत्संग के महत्व को रेखांकित करते हुए तुलसीदास जी का उल्लेख किया और कहा कि जिसके जीवन में विवेक होता है, वह आहार-विहार और विचार—तीनों में संतुलन रखता है। ऐसे व्यक्ति दीर्घायु होते हैं। रामचरितमानस के माध्यम से उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति सत्संग नहीं करता, उसके जीवन में खान-पान, वाणी और व्यवहार में विवेक का अभाव हो जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सत्संग को अपनाना चाहिए, जिससे विवेकपूर्ण और सदाचारयुक्त जीवन का निर्माण हो सके।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर धर्म, सदाचार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश आत्मसात करते नजर आए
कथा के दौरान पंडाल के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा का रसपान किया।इस आयोजन में आचार्य लक्ष्मी नारायण वैष्णव, वैदिक आचार्य नारायण प्रसाद पाठक, वैदिक आचार्य हुपेश पाठक, शिव भक्त मिथिलेश केसरवानी, प्रेरणासंत मुकेश बाबा जी, भानु साहू सहित आयोजन समिति एवं सिहावा-नगरी क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
