IISER पुणे कार्यशाला में धमतरी जिले के चयनित शिक्षकों ने खेल-खेल में विज्ञान-गणित अध्यापन की नवीन तकनीक....
नगरी – राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ की आयुक्त किरण कौशल के मार्गदर्शन, उपसंचालक डी.के. सारस्वत, सहसंचालक मंजूलता साहू एवं एपीसी राजेश सोनकर के निर्देशन तथा एपीसी बसंत कुमार वर्मा के नेतृत्व में 28 से 30 जनवरी 2026 तक भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) पुणे में तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य के 100 चयनित शिक्षकों ने भाग लिया, जिसमें धमतरी जिले से पांच शिक्षक सहभागी बने।
जिले से विकासखंड नगरी के अंतर्गत श्रीमती सुषमा अडील (माध्यमिक शाला पंडरीपानी माल) एवं मनोज पटेल (माध्यमिक शाला घटुला), विकासखंड धमतरी से हितेश साहू (माध्यमिक शाला साकरा) तथा विकासखंड कुरूद से शकुंतला कंवर एवं राम नारायण साहू शामिल हुए।
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला में विज्ञान एवं गणित की अवधारणाओं को दैनिक जीवन की गतिविधियों के माध्यम से सरल एवं रोचक ढंग से समझाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उपायों, मौसम परिवर्तन के प्रभावों तथा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से जीवन को सरल बनाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। भौतिकी, रसायन एवं जीव विज्ञान के विभिन्न विषयों को कहानी, प्रयोग एवं गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति से प्रभावी बनाने के अनेक व्यावहारिक सुझाव दिए गए।
पूरी कार्यशाला के दौरान अशोक रूपल सर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। ध्वनि विषय पर प्रोफेसर बापट, पक्षी विज्ञान एवं डार्विन के सिद्धांत पर प्रोफेसर सलीम, दैनिक जीवन में विज्ञान विषय पर अर्बन हजारा तथा रसायन विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर नीरज मैम ने विस्तृत जानकारी दी। साथ ही अर्णव सर, शालिनी मैम, अंकेश सर एवं राहुल सर ने भी विभिन्न सत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंतिम दिवस आयोजित फीडबैक सत्र में संस्थान के डायरेक्टर ने शिक्षकों को संबोधित किया। रायपुर संभाग से सुषमा अडील एवं बिलासपुर संभाग से अवधेश सर ने तीन दिवसीय कार्यशाला का सार प्रस्तुत किया। एपीसी बसंत कुमार वर्मा ने कार्यशाला की उत्कृष्ट व्यवस्था एवं सहयोग के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया।
शिक्षकों ने कहा कि यह कार्यशाला विज्ञान-गणित अध्यापन को प्रभावी एवं रोचक बनाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने राज्य स्तरीय अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं संबंधित समन्वयकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अवसर से कक्षागत शिक्षण कार्यों को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
