निरई माता दरबार में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, वर्ष में एक दिन ही खुलता है पावन धाम, महिलाओं का प्रवेश सख्त मना है

 

रिपोर्टर- कुलदीप साहू नगरी 
नगरी - छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सुदूर वनांचल में स्थित निरई माता मंदिर एक बार फिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण सुर्खियों में है। सिहावा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मगरलोड ब्लॉक के अंतिम छोर पर ग्राम मोहेरा के समीप निरई पहाड़ी पर विराजित इस पवित्र धाम में चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार, 22 मार्च को हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कठिन पहाड़ी मार्ग को पार कर माता के दरबार में हाजिरी लगाई। पत्थरों से भरे कच्चे रास्ते और ऊंची चढ़ाई के बावजूद भक्तों की आस्था अडिग रही। श्रद्धालु नारियल और अगरबत्ती अर्पित कर माता से सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते नजर आए।

इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि निरई माता का दरबार वर्ष में केवल एक बार, चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को ही खुलता है। वह भी प्रातः 4 बजे से सुबह 9 बजे तक मात्र 5 घंटे के लिए। इसी अल्प समय में हजारों श्रद्धालु दर्शन का लाभ लेने पहुंचते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण निर्मित हो जाता है।
मंदिर से जुड़ी एक अद्भुत मान्यता यह भी है कि यहां चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रज्ज्वलित की जाने वाली ज्योति बिना तेल के लगातार नौ दिनों तक जलती रहती है। यह रहस्य आज भी लोगों के लिए गहन आस्था और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।
परंपराओं के अनुसार, इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है। केवल पुरुष ही गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं महिलाओं द्वारा प्रसाद ग्रहण करना भी वर्जित माना जाता है। यहां अन्य देवी मंदिरों की तरह सिंदूर, कुमकुम या श्रृंगार अर्पित नहीं किया जाता, बल्कि श्रद्धालु केवल नारियल और अगरबत्ती चढ़ाकर ही पूजा करते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बकरे की बलि अर्पित करते हैं, जो वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है और अनुचित आचरण या नशे की हालत में आने वालों को माता के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है।
आस्था, रहस्य और परंपराओं का अद्भुत संगम बना निरई माता मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां लोगों की गहरी आस्था है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता अवश्य पूर्ण करती

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