नगरी- नगर पंचायत नगरी के प्लेसमेंट कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री अरुण साव के नाम प्रेषित किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने केंद्र के समान वेतनमान एवं सुविधाएं लागू करने की मांग उठाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत नगरी में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर उनके स्थान पर 4 नए श्रम संहिता (लेबर कोड) लागू किए गए हैं। इन नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को बेहतर वेतनमान, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सुविधाएं प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक इन नियमों का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे न्यूनतम वेतन पर कार्य कर रहे हैं, जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना कठिन होता जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के कई राज्यों में नए श्रम कानूनों के तहत वेतनमान लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। इस स्थिति से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
प्लेसमेंट कर्मचारियों ने शासन से मांग की है कि नए श्रम कानूनों के तहत केंद्रीय दरों पर वेतनमान एवं अन्य सुविधाएं शीघ्र लागू की जाएं, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान अध्यक्ष खेमलाल निषाद, प्रदेश महामंत्री शरदचंद पांडेय, उपाध्यक्ष ईश्वर दास कुलदीप, धनराज सेनवानी, दिलेश्वर कुमार साहू, सहसचिव प्रवीण सोम, कोषाध्यक्ष अजय कुमार साहू, जीवन लाल साहू, सलाहकार ईश्वर दास कुलदीप, दिलेश्वर कुमार साहू, प्रवक्ता दिलेश्वर कुमार साहू, मीडिया प्रभारी सतीश कुमार यादव, कमल नारायण सिन्हा तथा संगठन मंत्री रामरतन अम्बेतिया, योगेश कुमार निषाद, रामकुमार नेताम सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
कर्मचारियों ने अंत में शासन से शीघ्र निर्णय लेते हुए उनकी मांगों को पूरा करने की अपील की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और वे बेहतर तरीके से अपनी सेवाएं दे
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