श्रृंगी ऋषि आश्रम में प्रतिवर्ष होता है विष्णु महायज्ञ बड़ी संख्या में लोग आहुति डालते दिखाई दिए....
नगरी - मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रति वर्ष श्रृंगी ऋषि आश्रम में तीन दिवसीय विष्णु महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाता है। इस महायज्ञ में देश-प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर निःसंतान दंपत्ति, श्रद्धा और आस्था के साथ सम्मिलित होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस यज्ञ में सहभागिता करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
रामायण में वर्णित प्रसंग के अनुसार त्रेतायुग में अयोध्या नरेश राजा दशरथ को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। तब महर्षि श्रृंगी ऋषि द्वारा किए गए यज्ञ के फलस्वरूप ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न का अवतरण हुआ था। इसी पौराणिक मान्यता के कारण यह यज्ञ आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
यज्ञ की शुरुआत कलश यात्रा के साथ होती है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में महानदी के उद्गम स्थल पर स्नान कर श्रद्धालु यज्ञ में भाग लेते हैं। पर्वत श्रृंखला पर स्थित इस आश्रम और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण वातावरण आयोजन की भव्यता को और भी बढ़ा देता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
श्री श्रृंगी ऋषि विकास समिति के अध्यक्ष संजय सारथी ने बताया कि आयोजन की तैयारियां लगभग एक माह पूर्व से प्रारंभ कर दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष अनेक निःसंतान दंपत्तियों को इस यज्ञ के माध्यम से संतान सुख की प्राप्ति होने की अनुभूतियां सामने आती हैं।
इस आयोजन में श्री श्रृंगी ऋषि विकास समिति के संरक्षक राजेश यदु, नारायण पटेल, अंजोर सिंह निषाद, दीपक यदु सहित समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष संजय सारथी, उपाध्यक्ष रामकुर साहू, केदारनाथ मार्कण्डेय, मंशाराम गौर, सचिव चंद्रकांत शांडिल्य, कोषाध्यक्ष दिनेश निषाद, देव समिति अध्यक्ष देवव्रत गौतम एवं विशेष सहयोगी हृदय भंडारी, नारद निषाद, रामभरोश ध्रुव, हालधर शार्दुल, संपत यदु, संतोष पटेल, यशवंत नाग, तुकाराम साहू, विजय निषाद, भरत निर्मलकर, राजेश पटेल, लकेश पटेल, जितेंद्र पटेल, सोहन प्रजापति, सुरेश प्रजापति, केशव पटेल, पुखराज नाग, प्रकाश प्रजापति, मोनू पटेल सहित पंडरी पानी, सोनमगर, गढ़िया पारा, भीतरराश, सिरसिदा, रावण सिंघी, हीरापुर, शिवपुर, डोंगरी पारा, प्रेमनगर, सिहावा आदि ग्रामों के ग्रामीणजन आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता को भी सुदृढ़ करता है
