महाधरना 55वें दिन भी अडिग रहा महिलाओं ने लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन


सर्व समाज के समर्थन से और मजबूत हुई न्याय की लड़ाई

बिलासपुर :- लिंगियाडीह क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के आशियानों की रक्षा को लेकर चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अपने 55वें दिन भी पूरी मजबूती और अनुशासन के साथ जारी रहा। सर्वदलीय स्वरूप ले चुके इस आंदोलन में आज महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और प्रशासन को यह संदेश दिया कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं,बल्कि सम्मान और न्याय की है।

धरना स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए।महिलाओं द्वारा किए गए भजन-कीर्तन से वातावरण आध्यात्मिक और भावनात्मक बन गया। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना था कि वे किसी भी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं हैं,बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं।

इस अवसर पर सर्व समाज के वरिष्ठ नेता डॉ.रघु साहू ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि लिंगियाडीह में रहने वाले लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सर्व समाज और साहू समाज इस सर्वदलीय धरना आंदोलन के साथ खड़ा है और जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक समर्थन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह लोगों की व्यथा,उनकी वर्षों की मेहनत और बसे-बसाए घरों की पीड़ा को समझे और कोई भी निर्णय मानवीय दृष्टिकोण से ले।

डॉ.साहू ने आगे कहा कि बार-बार सर्वे और तोड़फोड़ की चेतावनियों से लोग मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं। गरीबों और मजदूर वर्ग के लिए घर केवल चार दीवारें नहीं,बल्कि उनकी पूरी जिंदगी की पूंजी होता है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था और उचित पुनर्वास के किसी भी प्रकार की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है।

आज के सर्वदलीय महाधरना आंदोलन में प्रमुख रूप से श्रीमती यशोदा पाटिल,श्याम मूरत कौशिक,कुंती तिवारी,डॉ.रघु साहू, साखन दरवे,भोला राम साहू,प्रशांत मिश्रा,श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव,सिद्धार्थ भारती,आदर्श सिद्धार्थ,दिनेश घोरे,डॉ. अशोक शर्मा,रूपेश साहू,ओंकार साहू,गोपी देवांगन,गोलू देवांगन, अग्नू साहू,सलीम मेमन सहित अनेक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

महिलाओं की भागीदारी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत के रूप में सामने आई। धरना स्थल पर रामबाई,राधा साहू,रामौतिन,सूरजबाई, कुमारी निषाद,संतोषी यादव,कुंती प्रजापति,चमेली रजक,जानकी गोड,फूलबाई साहू,पिंकी देवांगन,अनिता,उर्मिला,लीला पाटिल,रूपा सरकार,सरस्वती देवांगन,पुष्पा देवांगन,लता देवांगन,राजकुमारी देवांगन,मथुरा सूर्यवंशी,जमुना सूर्यवंशी,सनी अहिरवार,चंद्रमा अहिरवार,जयकुमार अहिरवार,पीहरिया केवट,सोनबाई,कुंडिया केवट,सोनिया केवट,नंदनी ध्रुव,पिंकी बाई चौहान,परमिला ध्रुव,रानी देवांगन,साधना यादव,चंद्रकली निषाद,सीता साहू,सुशीला साहू, सुवासिन साहू,कुमारी यादव,अमेरिका श्रीवास,नंद कुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव,रूपा देवी,गायत्री देवांगन,सहोदर गोड,सीता केवट, जानकी देवांगन,सोनिया मानिकपुरी,कौशल्या मानिकपुरी,मालती मानिकपुरी,मरजीना बेगम,सरस्वती यादव,वंदना डे,खोलबहरीन यादव,अनूपा श्रीवास,सुशीला श्रीवास,रामबाई मानिकपुरी,दुर्गा श्रीवास,राम भाई,सावित्री यादव,सुखमति मानिकपुरी,मीरा, शिवकुमारी देवांगन,अर्पणा पटेल,हेमलता देवांगन,सरिता राजपूत, मालती यादव,संतोष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल रहे।

धरना आंदोलन में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में मांग की कि लिंगियाडीह क्षेत्र में चल रही सर्वे और संभावित तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए,प्रभावित परिवारों से संवाद स्थापित किया जाए और स्थायी समाधान निकालते हुए उन्हें न्याय प्रदान किया जाए। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया,तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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