महर्षि कुभंज ऋषि आश्रम सिहावा में 3 दिवासीय रामचरितमानस गान का आयोजन का शुभारंभ..
नगरी - नगरी सिहावा महर्षि कुंम्भज ऋषि सप्त ऋषि की पावन स्थल महानदी चित्रोत्पल्ला गंगा की उद्गम स्थल से 1 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में मलयाचल पर्वत डोंगरीपारा (सिहावा) मे समाधि में लीन हो गए
सप्त ऋषियों के इस पावन धरा में अनेकों गाथा तुलसी कृत रामचरित मानस ग्रंथ में उपलब्ध है
इस तपोभूमि में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विगत 19 वर्षों से मानस सम्मेलन एवं सुन्दर काण्ड के माध्यम प्राकृतिक शिवलिंग जिसकी उँचाई लगभग 25 फिट है शिवरात्रि के दिन 1001 बेल पत्र, दुध, दही से अभिषेक कर मंत्रोउच्चारण के द्वारा विधिवत् पूजन किया जाता है बता दें आश्रम में त्रेता युग में भगवान भोले नाथ माता सती के साथ रामकथा सुनने इस आश्रम में आकर कुछ दिन रूक कर महर्षि से रामकथा का रसपान किया किन्तु सती को मोह होने की वजह से राम कथा श्रवण करने में वंचित हो गया रामकथा का रसपान नही करने से सती को मोह हो गया आश्रम से निकलने के अवसर पर मां सीता का हरण हो गया था।
जिसे खोजते हुए ये दोनो भाई राम लक्ष्मण को देख कर शिव जी ने दुर से ही प्रणाम किया। सती मोह वश भगवान को प्रणाम नही करने एवं भगवान का परीक्षा लेने सीता का रूप धरने से शंकर जी को सती ने विचित्र किया कर इस तन से सती का प्रेम नही होगा तुलसी दास के काव्य लेखनी सती जी ने शंकर जी सती के साथ कुम्भज ऋषि आये ताक लिखा की संत। सती जग जननी भवानी आश्रम में सतसंग कर बिदा लिये तो तुलसी दास ने दोहा के माध्यम से लिखा एक बार त्रेता युग माही, शंम्भु गये कुम्भज ऋषि पाहीं। सँग सती जग जननी भवानी, पुजे ऋषि अखिलेश्वर जानी।। रामकथा मुनिंवयं बखानी, सुनी महेश परम सुख मानी । कहत सुनत रघुपति, गुण गाधा, कछु दिन रहे तहां गृह नाथा ऋषि पुछी हरि भगती सुहाई, कही महेश अधिकारी पाई। - मुनि संग बिदा मांगी त्रिपुरारी, चले भर्वन संग दक्ष कुमारी ।।इस आश्रम में वन विभाग के द्वारा यज्ञ शाला और पेय जल 250 सीढ़ियों का निर्माण, सौर ऊर्जा का क्रेडा द्वारा बिजली की व्यवस्था स्थापित किया गया है।
सम्मेलन के आयोजन में अध्यक्ष भवानी लाल ध्रुव उपाध्यक्ष अशोक सुर्यवंशी मंशाराम गौर विसम्भर कश्यप सचिव अमरनाथ यदु नरेश कश्यप सह सचिव राजाराम कश्यप कोषाध्यक्ष किशन नाग प्रताप कश्यप, कार्यक्रम संयोजक देवब्रत सिंह गौतम संचालन दुर्गेश पटेल पोखराज सेन समस्त ग्रामवासियों का सहयोग रहता है
