74 दिनों से धूप-धूल में बैठी लिंगियाडीह की महिलाएं,शासन-प्रशासन की चुप्पी से उबाल पर जनाक्रोश


निगम की कार्रवाई से 130 परिवारों पर बेघर होने का खतरा, सर्वदलीय समर्थन से मजबूत हुआ ‘लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन’

बिलासपुर :- लिंगियाडीह बचाओ धरना आंदोलन ने 74वां दिन पूरा कर लिया है,लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी न तो नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है और न ही शासन स्तर पर कोई ठोस पहल होती दिखाई दे रही है। बीते ढाई माह से सैकड़ों महिलाएं,बुजुर्ग और बच्चे धूप,धूल और बारिश की परवाह किए बिना धरना स्थल पर डटे हुए हैं,लेकिन उनकी पीड़ा सुनने अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि नगर निगम की प्रस्तावित कार्रवाई से लगभग 130 परिवारों का आशियाना उजड़ने वाला है,जबकि न तो उन्हें वैकल्पिक पुनर्वास दिया गया है और न ही आवास पट्टा। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब सरकार “सबको आवास” की बात करती है,तो फिर गरीबों को बेघर क्यों किया जा रहा है?

प्रशासन की उदासीनता से बढ़ता आक्रोश धरनार्थियों का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन की लगातार उपेक्षा के कारण क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। 74 दिन बीत जाने के बावजूद न तो किसी अधिकारी ने स्थल पर पहुंचकर संवाद किया और न ही कोई लिखित आश्वासन दिया गया। इससे आंदोलनकारियों का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है।

सर्वदलीय और सामाजिक संगठनों का समर्थन लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन को अब सर्वदलीय स्वरूप मिल चुका है। कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी,कम्युनिस्ट पार्टी,आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना,जन चेतना पार्टी सहित अनेक सामाजिक व स्वैच्छिक संगठनों ने धरना स्थल पहुंचकर अपना समर्थन दर्ज कराया है। सभी दलों और संगठनों ने एकमत से मांग की है कि पहले सभी प्रभावित परिवारों का समुचित व्यवस्थापन और आवास पट्टा दिया जाए,उसके बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन इस आंदोलन को राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,विधायक अटल श्रीवास्तव,दिलीप लहरिया सहित कांग्रेस के प्रदेश व जिला पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों के साथ खड़े हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गरीब और कमजोर वर्गों के साथ अन्याय और अत्याचार बढ़ा है। नेताओं का कहना है कि जिन गरीबों ने लोकतंत्र में अपने मत से सरकार बनाई,आज उन्हीं गरीबों के खिलाफ सत्ता के इशारे पर नगर निगम कार्रवाई कर रहा है। यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला,तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

महिला शक्ति बनी आंदोलन की रीढ़ 74वें दिन विशेष रूप से महिला समूहों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन या मकान की नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा,तब तक वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद,धरना आंदोलन में प्रमुख रूप से श्रीमती यशोदा पाटिल,लता देवांगन,पुष्पा देवांगन,राजकुमारी देवांगन,साधना यादव,कल्पना यादव,सिद्धार्थ भारती,आदर्श सेवते,लखन कश्यप,लक्ष्मी लाल केवंट,पिंकी देवांगन, सोनिया निषाद,कुमारी निषाद,नंदकुमारी देवांगन,ललिता मानिकपुरी ,कुंती तिवारी,डॉ.रघु साहू,साखन दरवे,वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल, रामबाई,राधा साहू,सूरजबाई,संतोषी यादव,कुंती प्रजापति,चमेली रजक,जानकी गोड,फूलबाई साहू,उर्मिला,लीला पाटिल,रूपा सरकार,सरस्वती देवांगन,मथुरा सूर्यवंशी,जमुना सूर्यवंशी,सनी अहिरवार,चंद्रमा अहिरवार,जयकुमार अहिरवार,पीहरिया केवट,सोन बाई,सोनिया केवट,नंदनी ध्रुव,पिंकी बाई चौहान,परमिला ध्रुव,रानी देवांगन,चंद्रकली निषाद,सीता साहू,सुशीला साहू,सुवासिन साहू, अमेरिका श्रीवास,अनीता ध्रुव,गायत्री देवांगन,सहोदर गोड,कौशल्या मानिकपुरी,मालती मानिकपुरी,मरजीना बेगम,सरस्वती यादव,वंदना डे,अनूपा श्रीवास,सुशीला श्रीवास,दुर्गा श्रीवास सहित सैकड़ों महिलाएं,पुरुष और बच्चे सर्वदलीय महाधरना आंदोलन में उपस्थित रहे।

आंदोलन और तेज होने के संकेत धरनार्थियों ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जल्द ही प्रशासन ने बातचीत कर समाधान नहीं निकाला,तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा,जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।

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